Diabetic Retinopathy क्या होती है?

यह एक आँख की बीमारी है, जिसमें लंबे समय तक उच्च ब्लड शुगर (ग्लूकोज़) के कारण आँख की रेटिना (retina — आँख की पीछे की परत जहाँ प्रकाश को संकेतों में बदला जाता है) की छोटी-छोटी रक्त नलिकाएँ (blood vessels) क्षतिग्रस्त हो जाती हैं। इससे रेटिना पर खून का रिसाव (leakage), सूजन (swelling), और असामान्य रक्त नलिकाओं का विकास हो सकता है, जो दृष्टि को प्रभावित करता है।

जब ये रक्त-नलिकाएँ खराब हो जाती हैं, तो:

  • लीक हो सकती हैं (रक्त या फ्लुइड निकल सकता है) → रेटिना में सूजन (macular edema) या धुंधला दिखना हो सकता है।
  • रक्त प्रवाह कम हो जाता है → ऑक्सीजन की कमी हो सकती है → नई, कमजोर रक्त-नलिकाएँ बन सकती हैं (neovascularisation) जो और भी अधिक जोखिम उत्पन्न करती हैं।

सरल शब्दों में: अगर डायबिटीज़ है और लंबे समय से नियंत्रण अच्छा नहीं है → आँखों की छोटी रक्त नलिकाएँ धीरे–धीरे खराब हो जाती हैं → अंततः दृष्टि कम हो सकती है या गंभीर स्थिति में अंधत्व (blindness) भी हो सकती है।

यह बीमारी शुरुआत में लक्षण-रहित हो सकती है, अक्सर व्यक्ति को कोई शिकायत नहीं होती जब तक कि नुकसान काफी बढ़ न जाए।


किन लोगों को होता है?

  • किसी भी व्यक्ति को जो Diabetes Mellitus (टाइप 1 या 2) है, उसे डायबिटिक रेटिनोपैथी होने का जोखिम होता है।
  • विशेष रूप से नीचे के हालात वाले लोगों में जोखिम अधिक होता है:
  • डायबिटीज़ का समय लंबा होना (बहु वर्ष से)
  • ब्लड शुगर नियंत्रण खराब होना (उच्च HbA1c, बार-बार ऊँचा शुगर)
  • साथ-साथ अन्य स्वास्थ्य समस्या होना जैसे उच्च रक्तचाप (hypertension), उच्च कोलेस्ट्रॉल/लिपिड्स, गुर्दे की बीमारी (nephropathy) आदि।

जोखिम कारक (Risk Factors)

निम्नलिखित प्रमुख जोखिम कारक हैं जिनके होने से डायबिटिक रेटिनोपैथी होने या बढ़ने का खतरा बढ़ जाता है:

प्रमुख जोखिम कारक:
  • डायबिटीज़ की अवधि: जितना अधिक सालों से डायबिटीज़ है, जोखिम उतना ही अधिक।
  • उच्च ब्लड शुगर (Hyperglycemia) / HbA1c का स्तर: लंबे समय तक नियंत्रण में न रहने वाला शुगर आंखों की रक्त-नलिकाओं को नुकसान पहुँचाता है।
  • उच्च रक्तचाप (Hypertension): अतिरिक्त दबाव आँखों की रक्त नलिकाओं को और अधिक क्षति पहुँचा सकता है।
  • उच्च रक्तचाप (Hypertension): अतिरिक्त दबाव आँखों की रक्त नलिकाओं को और अधिक क्षति पहुँचा सकता है।
  • उच्च लिपिड / कोलेस्ट्रॉल (Dyslipidemia): आँखों में लीक-फ्लुइड या एक्स्युडेट्स बढ़ने का कारण बन सकता है।
अन्य जोखिम कारक:
  • गुर्दे की बीमारी (Nephropathy) / अन्य डायबिटिक जटिलताएँ — जैसे डायबिटिक न्यूरोपैथी आदि।
  • मोटापा / उच्च BMI — कुछ अध्ययनों में पाया गया है।
  • जातीय पूर्वाग्रह (Ethnicity) — कुछ जातियाँ (उदाहरण के लिए अफ़्रीकी-अमेरिकन, हिस्पैनिक) अधिक जोखिम में पाई गई हैं।
  • गर्भावस्था — यदि पहले से डायबिटीज़ है, तो गर्भावस्था के दौरान रेटिनोपैथी का बढ़ना संभव है।
  • धूम्रपान (Smoking) — रक्त-नलिकाओं को प्रभावित कर सकता है।

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